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BIHAR YUVA MANCH
कविता

शीर्षक: घर का बड़ा बेटा
वह सिर्फ एक नाम नहीं, पूरे घर की नींव होता है,
अपनी खुशियों को अपनों के लिए, चुपचाप सींव देता है।
बचपन उसका खिलौनों से नहीं, जिम्मेदारियों से बीतता है,
वो हारकर भी अपनों को, हर हाल में जीतता है।
पिता का वह साया है, माँ की वह उम्मीद है,
भाई-बहनों के सपनों की, वह सबसे पक्की रसीद है।
अपनी नई कमीज को वो, अक्सर टाल देता है,
छोटे की जिद पूरी हो, बस यही ख्याल पाल लेता है।
थकावट चेहरे पर होती है, पर मुस्कान नहीं खोती,
उसकी रातों की नींद, शायद चैन से नहीं सोती।
कंधों पर बोझ है भारी, पर वो अडिग खड़ा रहता है,
घर का बड़ा बेटा, बिना कहे सब कुछ सहता है।
आभार एवं धन्यवाद
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