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सोती किस्मत को जगाना है

शीर्षक: सोती किस्मत को जगाना है। यह कविता हमें जीवन के सबसे बड़े और कड़वे सत्यों से रूबरू कराती है। हाथ की लकीरों से नहीं, माथे के पसीने से इतिहास रचा जाता है; सोती किस्मत को जगाने का हुनर सिर्फ कड़ी मेहनत को आता है। - बिहार युवा मंच
कविता थंबनेल

BIHAR YUVA MANCH

कविता
Author

दीपक कुमार

साहित्यकार एवं रचनाकार

किस्मत के भरोसे बैठना कायरता है, उसे अपने पुरुषार्थ से जगाना ही असली वीरता है। याद रखिए, लकीरें हाथों में होती हैं, पर तकदीर मेहनत के पसीने से लिखी जाती है। जब इरादे फौलादी हों और संकल्प अटूट, तो सोई हुई किस्मत को भी जागकर आपका रास्ता साफ करना पड़ता है। उठो, संघर्ष करो और साबित कर दो कि तुम अपनी तकदीर के खुद निर्माता हो।

कलम की ताकत समाज का असली दर्पण है। मेरी हर रचना समाज के प्रति एक छोटी सी जिम्मेदारी है जो शब्दों के माध्यम से पूरी होती है।

BYM Watermark

शीर्षक:सोती किस्मत को जगाना है

अंधेरों की चादर ओढ़े, वह कब से मौन है, तेरी राह देख रही, पूछती तू कौन है? किस्मत के भरोसे बैठना, कायरों की रीति है, परिश्रम से ही बदलती, समय की प्रीति है। मत कह कि तेरी तक़दीर सो रही है, वह तो बस तेरे प्रयासों में खो रही है। जब तू पसीने की बूंदों से, माटी को सींचेगा, तभी तो तू सफलता को, अपनी ओर खींचेगा। चोट जितनी गहरी होगी, पत्थर मूरत बनता है, संघर्ष की आग में तपकर ही, सोना कुंदन बनता है। अपनी मेहनत की दस्तक से, उस सोई किस्मत को जगा, मंजिल तेरे पास आएगी, तू बस कदम आगे बढ़ा।
रचनाकार : दीपक कुमार
आभार एवं धन्यवाद
Founder

Founder & Author

Deepak Kumar

"बिहार युवा मंच का संकल्प है कि हर दबी हुई आवाज को साहित्य के माध्यम से एक सशक्त मंच मिले।"

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